
आनन्द कुमार गुप्ता
आज मधेश नेपाल का उपनिवेश है तो उसका सबसे बडा कारक तत्व बेलायत है । अँग्रेज – नेपाल युद्ध के दौरान मधेशियो ने तत्कालिन इस्ट इन्डिया कम्पनी को साथ दिया था क्यू कि गोरखा राज्य विस्तार के दौरान पृथ्बीनरायण साह ने छल कपट कर के मधेश का भूमि हडप लिए और मधेशियो का तत्कालिन तिरहुतिया सेना का बर्खास्त करते हुवे अघोशित रूप में राज्य का सारा निकायो में मधेशियो का पहुच पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया ।
यहा तक कि मधेशियो से कर तो लिया जाता रहा लेकिन अपने ही राजधानी काठमाडौं (तत्कालिन नेपाल) जाने के लिए भिसा लेना पडता था । इसि दमन , शोषण एवं उत्पिडन से तंग आके मधेशियो ने विद्रोह स्वरूप अँग्रेज – नेपाल युद्ध के दौरान अँग्रेज के साथ लडे थे और विजय भी प्राप्त हुवा, फलस्वरूप २ डिसेम्बर १८१५ में हुवा सुगौली संधी के माध्यम से मधेश लगायत सिक्किम, दार्जलिंग , कुमाऊ गढ़वाल लगायत गोर्खा अधिनस्त बहुत सारे भू-भाग तत्कालिन इस्ट इन्डिया कम्पनी सरकार ने ले लिया और गोर्खाली सरकार को प्रशासन चलाने हेतु सालाना रू २ लाख देने का सहमती हुवा लेकिन उसके बाद ८ डिसेम्बर १८१६ में इस्ट इन्डिया कम्पनी द्वारा भेजा गया एवं ११ डिसेम्बर को गोर्खा सरकार स्विकृत ज्ञापन पत्र के माध्यम से मधेश का मेची से राप्ती तक का भू-भाग २ लाख के बदला में गोर्खा सरकार को सौप दिया उसके साथ सम्झौता में लिखा गया कि :
Moreover, the Rajah of Nepal agrees to refrain from prosecuting any inhabitants of the Terai, after its revertance to his rule, on account of having favoured the cause of the British Government during the war, and should any of those persons, excepting the cultivators of soil, be desirous of quitting their estates, and of retiring the company’s territories, he shall not be to hindrance.Article 7.
(मतलब : इसके साथ नेपालका राजा अपने शासनअधिकार में आया हुवा मधेश का कोई भी बासिन्दा के उपर युद्ध के समय में बेलायती सरकार को सहयोग करने के अभियोग में किसी प्रकार का कार्यवाही नही करेगें, और उस जगह से मिटी के साथ प्रत्यक्ष सरोकार रखनेवाले बाहेक दुसरा जो कोही भी अपना श्री सम्पति छोडकर कम्पनी सरकार का भूमि में लौटना चाहे तो उनको कोई भी रोकटोक नही किया जाएगा, इस बात को राजा द्वारा स्विकार किया जाता है । )
लेकिन इस सम्झौता का बावजुत नेपाल के अन्दर मधेश उपनिवेश का शिकार है ।
अँग्रेज-नेपाल युद्ध के दौरान मधेशी द्वारा अँग्रेज सरकार को सहयोग करने के बावजुद भी मधेश एवं मधेशीयो को गोर्खाली शासक को सौपे जाने के कारण मधेशी उपनिवेश का शिकार है तथा अँग्रेज-नेपाल के बीच हुवा मधेशी संबन्धी संझौता को नेपाल द्वारा लागु नही करने के कारण मधेशी आज भी देश में बराबरी का अधिकार के लिए संघर्षरत है और नेपाल सरकार द्वारा गैर न्यायिक हत्या का भी शिकार हो रहे है ।
इस बात को बेलायत सरकार को ध्यानअकर्षण कराने हेतु मधेशीवादी दल को अभि नेपाल का भ्रमण में रहें बेलायत के सम्माननीय राजकुमार को मिलना चाहिए ।




अरे भाइ आनन्द गुप्ता! जो english का हिन्दी मे अनुवाद किया है उस्मे तराइको तुमने मधेश् मे कैसे अनुवाद कर दिया है रे! तुमतो बडा बेइमान निकला रे मनुवा! तुम ये बताओ कि नेपाल से सटा हुआ जो भारतिये भु भाग है उसको क्यो मधेश बोला नहि जाता? और वह इन्दिअन तराइ वाला भुभाग किसका उपनिबेश है ?येदि तुमारे कहाँ माने तो व भि india का उपनिबेश हुआ कि नहि? येदि तुम ऐसा लिखते रहोगे तो indian government तुम्हारा हि बैन्ड्बाजा बजायेगी।
ठिक भन्नु भयो बोहरा जी याे मधेशी ले त नाकमा दम गरि सक्याे भन्या
राम बाबू राम ईता….. सिरहा नेपाल । ओक आँप ए काहा से लाए आउर ए थिक हे तो । ए माधेसी लोक किउ नहि सम्झ ते हे । कया ओपेन्दर यादव ,महिन्दर मोह्तो, माह्न्त थाकुर, जाइसा माधेश मे बारे बारे नेताजो हे उस्को मलुम नहि हे
im madhesi but i’m not support of it. u bloody did british know even to madhesh? dont make the fake new. u baster the dog of india. madhes is son of nepal and my mother is nepal. those baster india always treat us badly and then also u guys in their support. my country gave me everythings, u bloody dog are those who make houseless to their mother.