कञ्चना झा

चार महीना कम नहीं होता । सब कुछ बन्द, अस्तव्यस्त लेकिन कोइ बात नहीं…….आत्म विश्वास में कोई कमी नहीं । वैसे तो मधेश में जारी आन्दोलन के समीक्षा करने का यह उचित समय नहीं है क्योंकि आन्दोलन चल ही रहा है । और पता भी नहीं है और कितना समय लगेगा मधेशियों को अधिकार पाने में । चार महीने के इस अंतराल को ही गर देखा जाए तो, मधेश ने बहुत कुछ खोया है । माँ के आंचल से बेटा चला गया, बहन जिस कलाई पर राखी बाँधती थी वह कलाई नहीं रहा, पत्नी के मांग का सिंदूर उजर गया , बच्चों के सर से पिता का साया उठ गया , बहुतों की जिंदगी विरान हो गई , कहें तो बहुतों के घर आंगन का सहारा खो गया । जीवन की नईया अब आगे कैसे बढेगी सोच कर सभी का मन भारी हो जाता है ।

आज की बात करें तो मधेश से लेकर राजधानी तक सबकुछ अस्त–व्यस्त , उद्योग व्यवसाय, कल कारखाना सबकुछ ठप्प ,लोगों का जीवन तो जैसे थम गया है, सीधे –साधे लोग जो दो वक्त की रोटी चैन से खाना चाहते हैं, वो भी नहीं खा पा रहें हैं । सबकुछ होते हुए भी आज कुछ नहीं है हमारे हाथ में ।

वास्तव में देखा जाय तो मधेश आन्दोलन ने बहुत कुछ छिना है हमसे लेकिन थोड़ी गंभीरता के साथ देखा जाय तो इस बार के आन्दोलन ने मधेश को बहुत कुछ दिया है । तकरीबन आठ साल पहले भी मधेश आन्दोलित था और उस आन्दोलन ने मधेश को काठमांडू तक पहुँचा दिया था । राजधानी के प्रमुख चौराहे पर मैथिली, भोजपुरी जैसी भाषाओं में नारा लिखा गया – गर्व स कहु हम मधेशी छी ।

इस बार अर्थात चार महीने से चल रहे आन्दोलन में जो क्षति हुई है वा जो शहीद हुए हैं उसकी भरपाई कभी नहीं, कोई नहीं कर सकता, लेकिन मधेश आंदोलन से जो हमें मिला है वह उपलब्धि भी छोटी नहीं । आज विश्व समुदाय जानने लगा है कि नेपाल के दक्षिणी भूभाग को मधेश कहा जाता है । यहाँ रहने वाले लोग मधेशी कहलातें है । श्याम वर्ण के इस समुदाय के साथ नये संविधान में अन्याय किया गया है । और अपने साथ हुए अन्याय के विरुद्ध जब यह समुदाय खडा हुआ तो उन्हे गोली से भुन दिया गया । इस समुदाय के करीब ५० लोग पुलिस के गोली का शिकार हो चुके है, हजारौं घायल हैं ।

कुछ महीने पहले तक मधेशी और धोती शब्द को सुनकर मधेशी समुदाय को गुस्सा आ जाता था उन्हें लगता था कि उनकी उपेक्षा की जा रही है , मजाक उड़ाया जा रहा है । लेकिन आज स्थिति में बदलाव आया है । और यही बदलाव आन्दोलन ने मधेश को दिया है । अब वह गर्व से कहता हैं, हाँ हम मधेशी हैं, मधेशी होने पर हमें गर्व है, हमने मधेश में जन्म लिया हम मधेशी हैं । वह अब शान से कहता है धोती मेरा लिवास है और अपने लिवास पहनने में हमें गर्व महसूस होता है ।

इससे पहले भी कई आंदोलन हुए, लेकिन अंतराष्ट्रीय स्तर पर मधेश, मधेशी, धोती शब्द से लोग रुबरु नहीं हुए थे । मधेश में आये इस परिवर्तन का श्रेय तो अन्ततः प्रमुख तीन दल के नेतागणों को ही देना होगा । मधेश के साथ इन लागों ने भारत को इतना ज्यादा जोडा कि अन्ततः भारत के राज्य सभा में नेपाल विषय पर करीब तीन घन्टा लम्बी बहस चली और सभी के सभी नेता ने यही कहा कि मधेश का साथ अन्याय हुआ है । बस क्या था मधेश शब्द अन्तराष्टी«य स्तर पर स्थापित हो गया ।

दूसरी महत्वपूर्ण बात जो उभर कर आई है वह है– मधेश के लोग अब समझने लगें है मीडिया का महत्व । पहली बार उन्हे एहसास हुआ है कि राष्ट्रस्तर का एक मीडिया उनका भी होना चाहिए । काठमान्डू में एक जुलुस निकला तो सारे मीडिया ने उसे उच्च स्थान दिया लेकिन मधेश के लोगो ने जब पूरव से पश्चिम तक मानव श्रृंखला बनाया तो कोई चर्चा नहीं । एक पुलिस मरा तो सभी अखबारों ने पहले पन्ने पर प्रकाशित किया लेकिन ५० लोगों की मौत के प्रति उनमें कोई संवेदना नहीं । काठमांडुू से प्रकाशित और प्रसारित होने वाले सञ्चार माध्यम की समाचार ने मधेश को और ज्यादा उग्र बना दिया । मधेश उग्र लेकिन दूसरी तरफ राजधानी चुप । ये नई तस्वीर उभर कर आई , देश का एक हिस्सा जल रहा है, देश का आधा हिस्सा अपना अधिकार के लिए संघर्ष में है लेकिन राजधानी के लोग चुपचाप । मधेश को समझ में आ गया कि अपनी ही भूमी पर हम अकेले है ।

सबसे दुखद क्षण तो वह था जब मधेश गम में था, आंदोलन में था ,अपने अधिकार के लिए बलिदान दे रहा था दूसरी तरफ राजधानी में दीवाली मनाई जा रही थी । और देश के प्रधानमन्त्री तुक्का मार रहे थे, कह रहे थे –पके हुए एक दो आम गिरने से पेड़ सूना नहीं हो जाता ।
आन्दोलन अब पाँचवे महीने में प्रवेश करने को है । डर है कि मधेश के नेता गण दिग भ्रमित न हो जायें । कोई ऐसी समझौता न कर बैठे कि मधेशियों को शर्मिन्दा होना पडेÞ ।

लेकिन इस बार के आन्दोलन ने एक और नया सबक सिखाया है वह है आन्दोलन कैसे किया जाय । अपेक्षा करें कि आन्दोलन से मधेश के लोगों को जो सबक मिला है वह अधिकार प्राप्ति के इस संघर्ष को और ज्यादा सशक्त बनायेगा और नेता गण दिगभ्रमित न हों इस बात के लिए कदम कदम पर खबरदारी करता रहेगा ।

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