मधेशवाद क्या है ? (विचार)

Bikash-tiwariविकास कुमार तिवारी

यदि कोई राजनीतिक विचारधारा जिसमें चार बातें हो, १. मुक्ति २. सिद्धांत ३. प्रणाली ४. कार्यविधि, तो वह वाद कहलाता है । मधेशवाद इसलिए वाद कहलाने योग्य है ,चूँकि इसमें यह चारों चीजें पाईं जातीं हैं ।

१. मुक्ति– मधेशवाद मुक्ति का सवाल है । यह राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दोनों प्रकार के मुक्ति के सवाल से जुड़ा हुआ है ।

२. सिद्धांत– मधेशवाद का लक्ष्य समतावाद है । अर्थात् समता इसका सिद्धांत है । समतामूलक समाज का निर्माण ही मधेशवाद का मूल लक्ष्य है ।

३. प्रणाली–मधेशवाद का लक्ष्य संघीय राज्य प्रणाली से है । ऐसी संघीयता जो स्वशासन और साझा शासन के सिद्धांत पर आधारित हो । और, मधेश के सन्दर्भ में अखंड मधेश सहित के संघीयता के पक्षधर मधेशवाद है।

४. कार्यविधि –मधेशवाद मे कार्यविधि का अर्थ आरक्षण से है । आरक्षण अर्थात् समानुपातिक प्रतिनिधित्व । इस संदर्भ में राजनेता गजेन्द्र नारायण सिंह जी की वाणी मननीय है । हम मधेशियों का एक ही आवाज हमें चाहिए सौ में पचास ।

और चूँकि गजेन्द्रवाद में भी उपर्युक्त चारों विचार विद्यमान हैं । अतः मधेशवाद और गजेन्द्रवाद में समरुपता है । इसलिए यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा जो मधेशवादी है वें गजेन्द्रवादी भी है और जो गजेन्द्रवादी है वें मधेशवादी भी है ।

अथार्त् सार में गजेन्द्रवाद और मधेशवाद का अर्थ यदि कोई बच्चा जन्म लेता है तो जन्म से ही वह देश और मधेश का मालिक बन कर जन्म ले वहीं मधेशवाद है और वहीं गजेन्द्रवाद है ।

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